वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस को घेरा, रविशंकर प्रसाद बोले- ‘माफी मांगे कांग्रेस नेतृत्व’, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के दिन कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव में बदलता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी की ओर से लगातार वंदे मातरम् का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने सोनिया गांधी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए।

माओवादियों को लेकर कांग्रेस पर रविशंकर प्रसाद का हमला

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पत्रकारों को यह याद रखना चाहिए कि मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान माओवादियों ने 76 बीएसएफ और सीआरपीएफ जवानों की हत्या की थी। उनके मुताबिक, उस समय सरकार की ओर से बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही गई थी। उन्होंने जेएनयू में आयोजित एक कार्यक्रम का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि जिन लोगों ने हमला किया था, उनके स्वागत की योजना बनाई गई थी।

खड़गे के लिए कुर्सी के इंतजाम वाली सफाई पर सवाल

वंदे मातरम् विवाद पर रविशंकर प्रसाद ने सोनिया गांधी के कथित वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि वह यह कहती हुई दिखाई दे रही हैं कि सिर्फ एक अंतरा गाना था और पूरा क्यों गाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब इस मामले को लेकर सवाल उठे तो मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने की सफाई दी गई। रविशंकर प्रसाद ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यक्रम में वह कुर्सी कहीं दिखाई नहीं पड़ रही थी।

‘कांग्रेस ने वंदे मातरम् का अपमान किया’

भाजपा सांसद ने कहा कि जिस पार्टी के बारे में आजादी के आंदोलन की अगुवाई करने का दावा किया जाता है, उसी पार्टी का मौजूदा नेतृत्व अगर वंदे मातरम् का तिरस्कार करता है तो इससे अधिक घृणित बात नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए और इसे सही ठहराने की कोई गुंजाइश नहीं है।

वंदे मातरम् के रचयिता के वंशज ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र

इस विवाद के बीच वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने भी सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर हुए विवाद पर दुख जताया। अपने पत्र में सुमित्रो चटर्जी ने वंदे मातरम् के गायन में रुकावट डालने की कथित कोशिश को ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना बताया है।

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